चंदखुरी कौशिल्या माता मंदिर में बदले जाएंगे श्री राम की मूर्ति…

रायपुर : छत्तीसगढ़ में सरकार बदलने के बाद अब बदलाव को लेकर सियासत तेज हो गई है। बीजेपी ने प्रदेश में कई सांस्कृतिक बदलाव के संकेत दिए है। इसी के तहत एक नया फैसला कौशल्या माता के चंदखुरी धाम को लेकर किया गया हैं। यहाँ भी प्रतिमा को बदलने की बात प्रदेश धर्मस्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कही हैं। सरकर के इसी फैसले के बाद एक बार फिर से पक्ष-विपक्ष आमने-सामने आ गए है।

500 साल के इंतजार के बाद अयोध्या में रामलला विराजमान हुए। इस मौके पर पूरा राष्ट्र राम भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। लोगों ने राम दीवाली मनाई गई। रामभक्ति का ये बुखार ठीक से उतरा भी नहीं कि राम के ननिहाल में प्रभु राम की मूर्ति पर राजनीति शुरु हो गई। दरअसल चंदखुरी में बनी राम की भव्य और ऊंची प्रतिमा को संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने बदलने का ऐलान किया है । बताया जाता है कि भाजपा ने इससे पहले फैसला किया था कि राजिम पुन्नी मेला का नाम फिर से बार राजिम कुम्भ रखा जाएगा।
इसके पीछे दलील थी कि भाजपा एक बार फिर से कुम्भ के नाम पर राजिम के राष्ट्रीय पहचान को स्थापित करना चाहती हैं।अब कौशल्या मंदिर में श्री राम जी की मूर्ति लगी है उसे हटाकर दूसरी मुरित लगाईं जाएगी। मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि एकमात्र कौशल्या माता मंदिर छत्तीसगढ़ में है और वहां राम जी की मूर्ति लगाई गई वह कृत्य है अब वहां प्रभु राम जी के गरिमा के लिए अनुरूप महा मूर्ति बनाई जाएगी। वही जो किसी कारणवश अयोध्या नहीं जा पाएंगे उनके लिए राम मंदिर के प्रतिलिपि बनाई जाएगी जो हो बहू होगी वहां प्रभु राम लाल के दर्शन कर पाएंगे।
बीजेपी ने मूर्ति बदलने के पीछे चाहे जो भी तर्क दिया हो। लेकिन कांग्रेस की तरफ से पीसीसी चीफ दीपक बैजन पलटवार करते हुए कहा कि कभी नाम बदलना तो कभी मूर्ति बदलना बीजेपी का बस यही काम है। कांग्रेस को कोसने से बेहतर है सरकार कोई काम करे। जवाब में उन्हें नसीहत मिली कि राम को नकारने वाले, उन्हें काल्पनिक बताने वाले सरकार को सीख ना दें।
जाहिर है पूर्व की कांग्रेस सरकार ने राम वनगमन परिपथ से जोड़ते हुए ना सिर्फ माता कौशल्या मंदिर का जीर्णाेद्धार कराया बल्कि यहां राम की भव्य और उंची प्रतिमा भी स्थापित कराई थी। अब जब कुछ महीने बाद लोकसभा चुनाव है। उससे ठीक पहले अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा और अब कौशल्या माता मंदिर से राम प्रतिमा को बदलने का फैसला, कहीं ना कहीं ऐलान है कि बीजेपी हिंदुत्व के मुद्दे को ना सिर्फ जिंदा रख रही है, बल्कि उसे नेक्सट लेवल पर भी लेकर जा रही है।

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