World’s Largest Office: भारत के इस जगह बना दुनिया का सबसे बड़ा ऑफिस स्पेस, US के पेंटागन को छोड़ा पीछे…

World’s Largest Office: अमेरिका के रक्षा मंत्रालय पेंटागन को पीछे छोड़कर भारत में अब दुनिया का सबसे बड़ा ऑफिस स्पेस होगा। 80 वर्षों तक, पेंटागन दुनिया का सबसे बड़ा ऑफिस स्पेस था लेकिन अब यह उपाधि सूरत शहर के नाम हो गई है। अमेरिका के पेंटागन को अभी तक दुनिया की सबसे बड़ी कार्यकारी बिल्डिंग माना जाता था। यानी कि इस बिल्डिंग में सबसे ज्यादा कर्मचारी एक साथ काम करते थे लेकिन अब सूरत के डायमंड एक्सचेंज (Surat diamond bourse) को ये तमगा मिला है। पेंटागन को पीछे छोड़कर ये बिल्डिंग दुनिया की सबसे बड़ी बिल्डिंग बन गई है। सूरत को विश्व की रत्न राजधानी के रूप में जाना जाता है, जहां दुनिया के 90% हीरे तराशे जाते हैं। नवनिर्मित सूरत डायमंड बोर्स में 65,000 से अधिक हीरा पेशेवर एक साथ काम कर सकेंगे।
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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 15 मंजिला यह इमारत 35 एकड़ भूमि में फैली हुई है और इसमें नौ आयताकार संरचनाएं बनी हैं। जो एक केंद्र से आपस में जुड़ी हैं। इस भव्य इमारत का निर्माण करने वाली कंपनी के अनुसार, इसमें 7.1 मिलियन वर्ग फुट से अधिक फर्श की जगह मौजूद है। इमारत का निर्माण चार साल में पूरा हुआ है। इस बिल्डिंग का आधिकारिक उद्घाटन नवंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के हाथ किया जाएगा।

Surat Diamond Bourse: पेंटागन को पीछे छोड़ भारत में बना दुनिया का सबसे बड़ा कार्यालय भवन, जानें क्या है खास - Surat Diamond Bourse Becomes Worlds Largest Office Building Surpasses ...

इस बिल्डिंग में 131 एलिवेटर्स और दूसरी फैसिलिटीज़ भी हैं। इस प्रोजेक्ट के सीईओ महेश गढ़वी का कहना है कि मुंबई से आने वाले हजारों कर्मचारियों को इससे मदद मिलने वाली है। ये लोग ट्रेन से मुंबई और सूरत के बीच चक्कर लगाते हैं लेकिन अब इस एक्सचेंज के खुलने के बाद इन लोगों को इससे राहत मिलेगी।
क्या है सूरत डायमंड एक्सचेंज?

Surat Diamond Bourse: भारत में होगा दुनिया का सबसे बड़ा कार्यालय भवन, सूरत की इस बिल्डिंग ने पेंटागन को पीछे छोड़ा,जानें क्या है खास -

सूरत डायमंड एक्सचेंज (SDB ) एक गैर-लाभकारी एक्सचेंज है, जो कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 8 के तहत पंजीकृत कंपनी है। ये बिल्डिंग सूरत और गुजरात में डायमंड बोर्स की स्थापना और प्रचार के लिए बनाई गई है। महेश गढ़वी ने बताया कि पेंटागन को पछाड़ना उनके उद्देश्य का हिस्सा नहीं था। बल्कि परियोजना का आकार मांग से तय होता है। उन्होंने आगे ये भी बताया कि इमारत बनने से पहले कई लोगों ने यहां ऑफिस भी खरीद लिए हैं।

 

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