डॉ खूबचंद बघेल की जयंती : नवीन मार्केट में आयोजित जयंती समारोह में शामिल हुए CM भूपेश बघेल…….

डॉ खूबचंद बघेल की जयंती : आज यानि 19 जुलाई को डॉ खूबचंद बघेल की जयंती है | इस अवसर पर राजधानी रायपुर के फूल चौक स्थित डॉ खूबचंद बघेल व्यवसायिक परिसर नवीन मार्केट में आयोजित जयंती समारोह में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने डॉ खूबचंद बघेल की मूर्ति पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी |
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ,खूबचंद बघेल की प्रशंसा करते कहते हुए
छत्तीसगढ़ के सबसे स्वर्व्श्रेष्ट यक्तियो में से एक थे , उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। वे एक कुशल संगठक, चिकित्सक, किसानों के हितैषी, सहकारिता आंदोलन के अग्रणी, लेखक व अच्छे कलाकार भी थे। डॉ. खूबचंद बघेल ने स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लिया। उनकी मां और पत्नी भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहीं।
देश की आजादी के बाद हमारा देश नये निर्माण के काल में था | उस समय सबसे बड़ा सवाल यही था कि एक नए भारत में छत्तीसगढ़ को भारत के नक्शे पर कैसे उभारा जाए , लोगों के जो सवाल हैं उनका समाधान कैसे ढूंढा जाए।
डॉ खूबचंद बघेल ने कहा कि इन सभी सवालों का एक ही समाधान है और वह यह कि पृथक छत्तीसगढ़ राज्य बने। छत्तीसगढ़ बनने में कई महापुरुषों ने अपना योगदान दिया और हमें आज यह नया राज्य मिला है। राज्य बनने के बाद हमारे पुरखों की जो उम्मीदें थी हम उन्हीं उम्मीदों को पूरा करने का कार्य कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि हमारी सरकार बनने के बाद
सबसे पहला फैसला हमने किसानों की ऋण माफी का लिया।
उसके बाद ढाई हजार रुपये क्विंटल धान खरीदने का निर्णय लेकर किसानों की उपज को मान दिया।
छत्तीसगढ़ का 44 प्रतिशत जंगल है। इसलिए हमने 65 प्रकार के लघु वनोपज की खरीदी की व्यवस्था बनाई।
हमारे राज्य की दो विभीषिकाएं बहुत बड़ी थी। एक पलायन और दूसरा नक्सलवाद। इन दोनों समस्याओं में बहुत कमी आई है।
सांस्कृतिक रूप से छत्तीसगढ़ को समृद्ध बनाने के लिए उठाये गए कदम
छत्तीसगढ़ राज्य को अपना राजगीत मिला है।
डॉ खूबचंद बघेल छत्तीसगढ़ की संस्कृति और यहां की परंपराओं के पोषक थे।
हमने 1 मई को श्रमिक दिवस को बोरे बासी दिवस के रुप में मनाया।
डॉ खूबचंद बघेल का गीत है – गजब विटामिन भरे हुए हे छत्तीसगढ़ के बासी मा । हमने बोरे बासी दिवस मनाकर उनके उस गीत और छत्तीसगढ़ के आहार को सम्मान दिया।
आज देश में छत्तीसगढ़ की पहचान यहां की संस्कृति से है, लघु वनोपज की खरीदी से है, स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल से है देश और दुनिया में छत्तीसगढ़ को लेकर सोच में परिवर्तन आया है। पहली बार हमने आदिवासी नृत्य महोत्सव आयोजित किया | जिसमें देश और विदेश के कई नृत्य समूहों ने हिस्सा लिया।
हमारा प्रयास छत्तीसगढ़ की प्राचीन, ऐतिहासिक, पौराणिक धरोहर को सामने लाने और सहेजने की है। यह वही परिवर्तन है जिसका सपना हमारे पुरखों ने देखा था कि हर छत्तीसगढ़िया में छत्तीसगढ़िया होने का स्वाभिमान जागे। सभी जिलों में हम छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा स्थापित कर रहे हैं। हम छत्तीसगढ़ की संस्कृति को महत्व देने का काम कर रहे हैं।

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